शिलाजीत सिर्फ ताकत की ही दवा नहीं
अच्छा
स्वास्थ्य हमारी मूल आवश्यकता है। हमारी मित्र प्रकृति ने हमें अनेक ऐसे
उपहार प्रदान किए हैं जो स्वस्थ रहने में हमारी मदद करते हैं। ऐसा ही एक
उपहार है शिलाजीत। यह पत्थर की शिलाओं में ही पैदा होता है इसलिए इसे
शिलाजीत कहा जाता है। ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने में सूयर् की प्रखर किरणों
से पवर्त की शिलाओं से लाख की तरह पिघल कर यह बाहर निकल आता है जिसे बाद
में इकट्ठा कर लिया जाता है।
यह चार प्रकार का होता है। रजतए स्वण्रए लौह तथा ताम्र शिलाजीत। प्रत्येक
प्रकार की शिलाजीत के गुण अथवा लाभ अलग.अलग हैं। रजत शिलाजीत का स्वाद
चरपरा होता है। यह पित्त तथा कफ के विकारों को दूर करता है। स्वण्र शिलाजीत
मधुरए कसैला और कड़वा होता है जो बात और पित्तजनित व्याधियों का शमन करता
है। लौह शिलाजीत कड़वा तथा सौम्य होता है। ताम्र शिलाजीत का स्वाद तीखा
होता है। कफ जन्य रोगों के इलाज के लिए यह आदर्श है क्योंकि इसकी तासीर
गर्म होती है।
समग्र रूप में शिलाजीत कफए चर्बीए मधुमेहए श्वासए मिर्गीए बवासीर उन्मादए
सूजनए कोढ़ए पथरीए पेट के कीड़े तथा कइर् अन्य रोगों को नष्ट करने में
सहायक होता है। यह जरूरी नहीं है कि शिलाजीत का सेवन तभी किया जाए जब कोइर्
बीमारी हो स्वस्थ मनुष्य भी इसका सेवन कर सकता है। इससे शरीर पुष्ट होता
है और बल मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सेवन के लिए मात्रा बारह रत्ती से दो रत्ती के बीच
निर्धारित की जानी चाहिए। मात्रा का निर्धारण रोगी की शारीरिक स्थिति उसकी
आयु और उसकी पाचन शक्ति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। शिलाजीत का
सेवन दूध और शहद के साथ सुबह सूयोर्दय से पहले कर लेना चाहिए। इसके ठीक
प्रकार पाचन के बाद अर्थात तीन.चार घंटे के बाद ही भोजन करना चाहिए।
दिमागी ताकत के लिए प्रतिदिन एक चम्मच मक्खन के साथ शिलाजीत का सेवन
लाभदायक होता है । इससे दिमागी थकावट नहीं होती। मधुमेहए प्रमेह और मूत्र
संबंधी विकारों के निराकरण में शिलाजीत बेहद उपयोगी सिद्ध हुआ है। एक चम्मच
शहदए एक चम्मच त्रिफला चूण्र के साथ लगभग दो रत्ती शिलाजीत का सेवन प्रमेह
रोग को नष्ट कर देता है। इस मिश्रण का सेवन सूयरेदय से पहले ही करना
चाहिए। मधुमेह के इलाज के लिए थोड़ी.थोड़ी मात्रा में प्रतिदिन लगातार
शिलाजीत का सेवन तब तक किया जाना चाहिए जब तक कि लगभग पांच सेर मात्रा रोगी
के शरीर में न पहुंच जाए। यह रोगी की स्थिति बहुत हद तक ठीक कर देता है।
मूत्रावरोधए पीड़ा जलन और प्रमेह के उपचार के लिए पीपल और छोटी इलायची को
बराबर मात्रा में मिलाकर चूण्र बना लेंए इस एक चम्मच चूण्र के साथ शिलाजीत
का सेवन लाभदायक होता है।
यदि किसी को बार.बार पेशाब आएए रात को भी पेशाब के लिए बार.बार उठना पड़े
तथा एक साथ भारी मात्रा में पेशाब आए तो समझ लें कि ये लक्षण बहुमूत्रता के
हैं। इस बीमारी को दूर करने के लिए शिलाजीतए बंगभस्मए छोटी इलायची के दाने
और वंशलोचनल को समान मात्रा में लेकर शहद के साथ मिलाकर दो.दो रत्ती की
गोलियां बनाकर गर्म दूध के साथ इनका सेवन करें। सुबह.शाम इसकी दो.दो
गोलियां लेना ही पयरप्त होता है। साथ ही इससे शरीर सुडौल और शक्तिशाली भी
बनता है।
आधुनिक जीवन शैली में उच्च रक्तचाप एक आम समस्या बनता जा रहा है। रक्तचाप
को सामान्य स्तर पर लाने के लिए काली साखि। पांच ग्राम और दस ग्राम मुलहठी
में दो कप पानी डालकर काढ़ा बनाएं। जब यह पानी आधा रह जाए तो इसे छान लें।
दो.दो रत्ती की एक.एक गोली के साथ काढ़े का सेवन करने और रात को किसी
विरेचन चूण्र के प्रयोग से पेट साफ रखें। इससे रक्तचाप एक हफ्ते में ही
सामान्य स्तर पर आ जाता है।
जो लोग शीघ्रपतन की समस्या से ग्रसित है उन्हें भी शिलाजीत से लाभ पहुंचता
है इसके लिए बीस.बीस ग्राम शिलाजीत और बंग भस्म में दस ग्राम लौह भस्म और
छरू ग्राम अभ्रम भस्म मिलाकर घोटकर दो.दो रत्ती की गोलियां बना लें। सुबह
के समय एक गोली को मिश्री मिले दूध के साथ सेवन आश्चयर्जनक लाभ देता है।
शाम को भी इस योग का प्रयोग किया जा सकता है परन्तु शाम को भोजन के दो.तीन
घंटे के बाद ही इसका प्रयोग करें।
विशेषज्ञों के अनुसार शिलाजीत का प्रयोग करने के पहले वमनए विरेचन आदि
क्रियाओं को करके शरीर को शुद्ध किया जाना जरूरी है इससे लाभ अधिक होता है।
साथ ही इसका सेवन सूयोर्दय से पहले शहद या दूध के साथ करना चाहिए इसका
सेवन करने के बाद चावलए दूध या जौ से बनी किसी चीज का सेवन करना चाहिए।
शिलाजीत का प्रयोग उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिनके शरीर में पित्त का
प्रकोप हो। जिनके शरीर में गर्मी बढ़ी हुइर् हो उन्हें भी शिलाजीत से परहेज
ही रखना चाहिए। शिलाजीत के सेवन के दौरान मिर्च.मसालेए खटाइर्ए मांस.मछलीए
अंड़े तथा शराब आदि का प्रयोग वर्जित है साथ ही कब्जए मानसिक शोक तथा
तनावए रात में जागनाए दिन मेंे सोना तथा लगातार ज्यादा मात्रा में शारीरिक
श्रम आदि से भी बचना चाहिए। यांे तो शिलाजीत का सेवन केवल कुछ दिनों तक
सेवन किया जाता है तो इससे कोइर् नुकसान नहीं है।
शिलाजीत एक पौष्टिक द्रव्य है। परन्तु राह चलते या पटरी पर बैठे खरीददार से
शिलाजीत खरीदने में धोखा हो सकता है इसलिए उसकी जांच करके ही खरीदें जो
शिलाजीत पानी में डालते ही तार.तार होकर तली में बैठ जाए वही असली शिलाजीत
है। साथ ही सूखने पर उसमें गोमूत्र जैसा गंध आएए रंग कालाए वजन हल्का तथा
छुअन चिकनी हो तो समझ लें कि यही असली शिलाजीत है।
Reference:http://www.prabhasakshi.com/ShowArticle.aspx?ArticleId=111108-103510-150010
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