Sunday, April 12, 2015

हल्‍दी

 हल्‍दी : Turmeric

  • 1. आयुर्वेदिक बनौषधियां : हल्‍दी के औषधीय उपयोग डा 0 देशबन्‍धु बाजपेयी कनक पालीथेरेपी क्‍लीनिक एवं रिसर्च संस्‍थान 67-70, भूसाटोली रोड , बरतन बाजार , कानपुर 208001, उत्‍तर प्रदेश , भारत फैक्‍स : 91 512 2308092
  • 2. हल्‍दी : Turmeric
    • इस दृव्‍य को सभी भारतीय , भोज्‍य पदार्थ के रूप में प्रयोग करते हैं
    • आयुर्वेद में इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं
    • घरेलू उपचार में इसे प्रयोग करते हैं
    • बाहरी उपचार में इसे प्रयोग करते हैं
    सूखी हल्‍दी का चूर्ण
  • 3. हल्‍दी के विभिन्‍न भाषाओं में नाम
    • संस्‍कृत : हरिद्रा , कांचनीं , वरवर्णिनीं , पीता
    • बंगला : हलुद , हरिद्रा
    • मराठी : हलद
    • गुजराती : हलदर
    • कन्‍नड़ : अरसीन
    • तेलुगू : पासुपु
    • फारसी : जरदपोप
    • अरबी : डरूफुस्‍सुकुर
    • English : Turmeric
    • Latin : Curcuma Longa, Curcuma Domestica
  • 4. हल्‍दी के प्रकार हल्‍दी दो प्रकार की होती है , एक लम्‍बी तथा दूसरी गोल लम्‍बी हल्‍दी गोल हल्‍दी
  • 5. हल्‍दी परिचय :1
    • यह खेतों में बोई जाती है , लेकिन कई स्‍थानों में यह स्वयमेव उतपन्‍न हो जाती है
    • जमीन के नीचे कन्‍द के रूप में इसकी जड़ें होती है
    • ये कन्‍द रूपी जड़ें हरी अथवा ताजी अथवा कच्‍ची हल्‍दी होती है
  • 6. हल्‍दी परिचय : 2
    • कच्‍ची हल्‍दी की सब्‍जी बनाकर खाते हैं
    • कच्‍ची हल्‍दी को सुखा लेते हैं या उबालकर सुखा लेते हैं , ऐसी हल्‍दी सूखने के बाद रंग परिवर्तन होकर पीला रंग ग्रहण कर लेती है
  • 7. हल्‍दी के रासायनिक तत्‍व
    • हल्‍दी में कई प्रकार के रासाय‍निक तत्‍व पाये जाते हैं
    • एक प्रकार का सुगंधित उडंनशील तैल 1 प्रतिशत
    • एक प्रकार का गोंद जैसा पदार्थ
    • एक प्रकार का पीले रंग का रंजक पदार्थ
    • एक प्रकार का गाढा तेल
  • 8. कुछ आधुनिक तथ्‍य
    • वैज्ञानिकों का कहना है कि हल्‍दी में लौह तत्‍व पाया गया है
    • इसमें विटामिन बी ग्रुप के कुछ तत्‍व पाये गये हैं
  • 9. विश्‍लेषण में पाये गये तत्‍व - 1
    • हल्‍दी में पाये गये आवश्‍यक तत्‍व निम्‍न प्रकार हैं
    • जल 13.1 % ग्राम
    • प्रोटीन 6.3 % ग्राम
    • वसा 5.1 % ग्राम
    • खनिज पदार्थ 3.5 % ग्राम
    • रेशा 2.6 % ग्राम
    • कारबोहा‍‍इड्रेट 69.4 % ग्राम
  • 10. विश्‍लेषण में पाये गये तत्‍व - 2
    • कैल्शियम 150 मिलीग्राम प्रतिशत
    • फासफोरस 282 मिलीग्राम प्रतिशत
    • लोहा 15 मिलीग्राम प्रतिशत
    • विटामिन ए 50 मिलीग्राम प्रतिशत
    • विटामिन बी 03 मिलीग्राम प्रतिशत
    • कैलोरियां प्रति 100 ग्राम में : 349 कैलोरी
  • 11. हल्‍दी के गुण -1
    • आयुर्वेद में हल्‍दी के गुणों का वर्णन कई ग्रंथों में मिलता है
    • हल्‍दी स्‍वाद में चरपरी , कड़वी प्रभाव में रूखी और गर्म होती है
    • यह कफ तथा पित्‍त दोषों को दूर करती है
  • 12. हल्‍दी के गुण -2
    • इसे त्‍वचा के रोग , वर्ण , प्रमेह , रक्‍त विकार , सूजन , पान्‍डु रोग और घावों के इलाज के लिये प्रयोग करते हैं
    • आधुनिक शोधों से पता चला है कि हल्‍दी तमाम प्रकार के रोगों को दूर करनें में सहायक है
  • 13. हल्‍दी के बारे में आयुर्वेद विचार
    • हल्‍दी तिक्‍त , कटु , उष्‍णवीर्य , रूक्ष , वर्ण्‍य , लेखन , कुष्‍टघ्‍न , विषघ्‍न , शोधन गुण युक्‍त है
    • इसके प्रयोग से कफ , पित्‍त , पीनस , अरूचि , कुष्‍ठ , कन्‍डू , विष , प्रमेह , व्रण , कृमि , पान्‍डु रोग , अपची आदि रोंग दूर होते हैं
  • 14. हल्‍दी के बारे में आधुनिक विचार
    • हल्‍दी के बारे में आधुनिक वैज्ञानिकों नें परीक्षण करके सिद्ध किया है कि यह कैंसर को बढ़नें से रोकती है
    • यह गठिया जैसे रोंगों की पीड़ा को दूर करती है
  • 15. हल्‍दी की औषधीय मात्रा
    • कच्‍ची हल्‍दी का रस : 1 से 3 चाय चम्‍मच तक
    • सूखी हल्‍दी का चूर्ण : 1 ग्राम से 4 ग्राम तक
    • यह वयस्‍क व्‍यक्ति के लिये निश्चित की गयी मात्रा है
    • किशोंरों के लिये 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम तक
    • बच्‍चों के लिये 50 मिलीग्राम से 100 मिली ग्राम तक
  • 16. हल्‍दी की मात्रा
    • इसके कोई साइड इफेक्‍ट नहीं हैं और हल्‍दी पूर्ण रूप से सुरक्षित औषधि है
    • इसे आवश्‍यकतानुसार गुनगुनें पानीं , गरम चाय अथवा दूध के साथ दिन मे , तकलीफ के हिसाब से , एक बार से लेकर चार या पांच बार तक ले सकते हैं
  • 17. हल्‍दी के बाहरी प्रयोग - 1
    • त्‍वचा के रोगों में हल्‍दी का बाहरी प्रयोग करते हैं
    • हल्‍दी का चूर्ण 1 ग्राम और आवश्‍कतानुसार दूध मिलाकर बनाया हुआ पेस्‍ट मुहासों , युवान पीडिका , सफेद दागों या काले दागों , रूखी त्‍वचा , काले रंग के त्‍वचा के धब्‍बे , खुजली , खारिश आदि तकलीफों में लगानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है
    • घाव , कटे एवं पके हुये , पीब से भरे घावों में हल्‍दी का चूर्ण छिड़कनें से घाव शीघ्र भरते हैं
  • 18. हल्‍दी के बाहरी प्रयोग -2
    • चाकू या धारदार अस्‍त्र से शरीर का कोई अंग कट जानें पर हल्‍दी का चूर्ण छिड़कनें से लाभ प्राप्‍त होता है
    • बवासीर के मस्‍सों का दर्द अथवा जलन ठीक करनें के लिये हल्‍दी का चूर्ण मस्‍सों पर छिड़कना चाहिये
  • 19. हल्‍दी के बाहरी प्रयोग -3
    • चेहरे का सौंदर्य , त्‍वचा का सौंदर्य ‍निखारनें के लिये हल्‍दी का उबटन प्रयोग करना चाहिये
    • एलर्जी , शीतपित्‍ती , जलन का अनुभव , ददोरे आदि पड़ जानें की तकलीफ में हल्‍दी को पानी के साथ पेस्‍ट जैसा बनाकर लगानें से आराम मिलता है
  • 20. हल्‍दी के बाहरी प्रयोग -4
    • फोड़ा फुन्‍सी पकानें के लिये हल्‍दी की पुल्टिस रखनें से फोड़ा फुंसी शीघ्र पक जाते हैं
    • शरीर के किसी भी स्‍थान की सूजन के साथ दर्द और जलन हो तो हल्‍दी के पेस्‍ट का बाहरी प्रयोग करनें से इन तकलीफों में आम मिल जाती है
  • 21. आंतरिक प्रयोग - जुखाम , खांसी , बुखार
    • सभी प्रकार के बुखार , जुखामों और खांसियों में हल्‍दी का चूर्ण 1 से 3 ग्राम तक गरम पानीं से दिन में दो बार , सुबह शाम , खानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है
    • जुकाम , बुखार अथवा खांसी कैसी भी हो , नया हो अथवा पुराना , उक्‍त प्रकार से हल्‍दी का सेवन करनें से सभी अवश्‍य ठीक हो जाते हैं
  • 22. आंतरिक प्रयोग - साइनुसाइटिस
    • नाक से संबंधित सभी तरह की तकलीफों , पुराना जुकाम , पीनस , नाक का गोश्‍त बढ़ जानें , साइनुसाइटिस में हल्‍दी का चूर्ण 1 से 2 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार खाने से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है
    • उक्‍त तकलीफों से होनें वाले सिर दर्द , बुखार , बदन दर्द आदि लक्षण ठीक हो जाते हैं
  • 23. आंतरिक प्रयोग - एलर्जी
    • एलर्जी , शीतपित्‍ती या इसी तरह के लक्षणों और तकलीफों से परेशान रोगी हल्‍दी का चूर्ण , 1 से 2 ग्राम , सुबह और शाम , दिन में दो बार , आधा कप दूध और आधा कप पानी मिलाकर , इस प्रकार से पकाये दूध के साथ खानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है
    • दूध में यदि चाहें तो थोड़ी शक्‍कर स्‍वाद के लिये मिला सकते हैं
  • 24. इस्‍नोफीलिया
    • इस्‍नोफीलिया में हल्‍दी का प्रयोग बहुत सटीक है
    • 2 से 3 ग्राम हल्‍दी चूर्ण गुनगुनें पानीं से , दिन में तीन बार , खानें से इस रोग में आराम मिलती है
    • कुछ दिनों तक लगातार खानें से रोग समूल नष्‍ट हो जाते हैं
    • जैसे जैसे इसनोफीलिया का काउन्‍ट कम होता जाये , वैसे हल्‍दी की मात्रा अनुपात में घटाते जाना चाहिये
  • 25. दमा और अस्‍थमा में
    • इस रोग में हल्‍दी का चूर्ण 2 से 3 ग्राम तक अदरख के एक या दो चम्‍मच रस और शहद मिलाकर दिन में चार बार खानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है
    • कुछ दिनों तक यह प्रयोग लगातार काना चाहिये
    • अगर रोगी एलापैथी की दवायें खा रहा है , तो भी यह प्रयोग कर सकते हैं
    • जैसे जैसे आराम मिलता जाय , एलापैथी दवाओं की मात्रा कम करते जांय
  • 26. यकृत प्‍लीहा की बीमारियों में
    • यकृत की बीमारियों में हल्‍दी का उपयोग आदि काल से किया जा रहा है
    • यकृत के सभी विकारों में , पीलिया , पान्‍डु रोग इत्‍यादि में हल्‍दी का चूर्ण 1 ग्राम , कुटकी का चूर्ण 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में तीन बार सादे पानीं के साथ खाना चाहिये
    • प्‍लीहा की सभी बीमारियों में उक्‍त चूर्ण मिश्रण खाना चाहिये
  • 27. प्रमेह
    • प्रमेह रोग से संबंधित सभी विकारों में हल्‍दी का उपयोग बहुत सटीक है
    • बहुमूत्र , गंदा पेशाब , पेशाब में जलन , पेशाब की कड़क , पेशाब में एल्‍बूमेंन जाना , पेशाब में रक्‍त , पीब के कण आदि आदि रोगों में हल्‍दी चूर्ण 1 ग्राम दिन में चार बार सादे पानीं से सेवन करें
    • अगर इन बीमारियों में कोई एलोपैथी की दवा खा रहे हों , तो उनके साथ हल्‍दी का उपयोग करें , शीघ्र लाभ होगा
  • 28. मधुमेह
    • हल्‍दी 2 ग्राम , जामुन की गुठली का चूर्ण 2 ग्राम , कुटकी 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में चार बार सादे पानीं से खायें
    • पथ्‍य , परहेज करें , कई हफ्तों तक औषधि प्रयोग करें
    • मधुमेह के साथ जिनको पैंक्रियाटाइटिस , यकृत प्‍लीहा विकार , गुर्दे के विकार , आंतों से संबंधित विकार हों , ये सभी तकलीफें दूर होंगी
  • 29. शास्‍त्रोक्‍त प्रयोग
    • हल्‍दी के शास्‍त्रोक्‍त प्रयोग बड़ी संख्‍या में आयुर्वेद के चिकित्‍सा ग्रंथों में मिलते हैं
    • इनमें से बहुत से प्रयोग तमाम प्रकार की बीमारियों के उपचार में इस्‍तेमाल किये जाते हैं
  • 30. सलाह
    • अगर आप कोंई एलोपैथी की दवा खा रहे हैं या होम्‍योपैथिक या कोई अन्‍य उपचार कर रहे हैं , तो भी , आप हल्‍दी का प्रयोग कर सकते हैं
    • हल्‍दी के प्रयोग करनें से , उपचार पर , कोई असर नहीं पड़ता है
    • हल्‍दी के प्रयोग से , किये जा रहे उपचार , अधिक प्रभावकारी हो जाते हैं
  • 31. देंखें संदर्भ ग्रंथ
    • हल्‍दी के गुणों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्‍त करनें के लिये निम्‍न ग्रंथों को देखना चाहिये
    • भाव प्रकाश निघन्‍टु
    • बनौषधि चन्‍द्रोदय
    • भारत भैषज्‍य रत्‍नाकर
    • Indian Materia Medica
  • 32. मेंरा अनुभव
    • मेंरा व्‍यक्तिगत अनुभव , हल्‍दी के बारे में , बहुत अच्‍छा रहा है
    • मैं सभी रोगियों को , चाहे वे किसी भी रोग से पीडित हो , उनके फार्मूले में हल्‍दी का मिश्रण उचित अनुपात में करता हूं , इससे फार्मूले की गुणवत्‍ता और अधिक बढ़ जाती है
    • मैं सूखी हल्‍दी का चूर्ण प्रयोग करता हूं और चूर्ण को एक कप या आधा कप पानीं या दूध में घोलकर पीनें के लिये कहता हूं
  • 33. डा 0 देश बंधु बाजपेयी
    • जन्‍म 20 नवम्‍बर 1945
    • 40 सालों से अधिक एलोपैथी , आयुर्वेदिक , होम्‍योपैथिक चिकित्‍सा विधियों से प्रैक्टिस
    • एकूपंक्‍चर , मेग्‍नेट थेरेपी , फिजियोथेरेपी , योग , प्राकृतिक चिकित्‍सा , इलेक्‍ट्रोथेरेपी आदि द्वारा चिकित्‍सा कार्य करनें का अनुभव
    • आविष्‍कारक : इलेक्‍ट्रोत्रिदोषग्राफी , शंखद्राव आधारित औषधियां , पेंटास्‍केल आयुर्वेदिक औषधियां
    • असाध्‍य रोगों , कठिन रोंगों , पुरानीं बीमारियों के इलाज में एक्‍सपर्ट चिकित्‍सक
  • 34. आयुर्वेदिक औषधियों का प्राप्ति स्‍थान
    • अगर आपको आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों और तैयार की गयी औषधियों को प्राप्‍त करनें में कठिनाई आ रही हो , तो आप सभी तरह की आयुर्वेदिक औषधियों के लिये , निम्‍न स्‍थान से सम्‍पर्क करके , प्राप्‍त कर सकते हैं
    • [email_address]
  • 35. निवेदन :
    • समय समय पर इस स्‍लाइड शो में आवश्‍यकतानुसार परिवर्तन किये जाते हैं , अपडेट देखनें के लिये समयान्‍तर पर स्‍लाइड शो देखते रहें
    • इस स्‍लाइड शो के बारे में अपनें डाक्‍टर , मित्रों , संबंधियों को जानकारी देंनें का प्रयास करें
    • अपनें सुझाव इस स्‍लाइड शो के बारे में देते रहें
  • 36. वीडियो प्रस्‍तुति
    • निम्‍न वेब साइट पर आयुर्वेद से संबंधित वीडियो देखें
    • http://www. youtube.com/drdbbajpai
  • 37. स्‍लाइड शो
    • निम्‍न वेब साइट पर स्‍लाइड शो देखें , जो आयुर्वेद से संबंधित हैं
    • http ://www. slideshare.net/drdbbajpai
  • 38. डा 0 देश बन्‍धु बाजपेयी द्वारा रचित निम्‍न वेब साइट देखें , जहां आयुर्वेद के संबंध में महत्‍वपूर्ण जानकारियां दी गयीं हैं
    • http://etgind.wordpress.com
    • http://ayurscan.wordpress.com
    • http://ayurvedaintro.wordpress.com
    • http ://herbalsupply.wordpress.com

Reference: http://www.slideshare.net/drdbbajpai/hindi-ayurvedi-aushadhiyan-haldike-upayog

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